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Management

प्रबंधन एक ऐसी प्रक्रिया है जो संगठन के लक्ष्य तथा उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए कार्य करता है आधुनिक प्रबंध का एक विशेष लक्षण इसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण है। अतः वर्तमान प्रबंधन वैज्ञानिक प्रबंधन के नाम से जाना जाता है।

हेनरी फेयोल के अनुसार प्रबंधन का आशय पूर्वानुमान लगाना एवं योजना बनाना, संगठित करना, निर्देश देना तथा नियंत्रण करना है। सर्वप्रथम 1961 में हेनरी फेयोल ने प्रबंधन के तत्वों का अध्ययन करके क्रमबद्ध किया और प्रबंधन के पांच तत्व बताएं -planing, organization, direction, coordination and controlling

POPSI

POPSI (Postulate based permuted subject indexing) यह अनुक्रमणी करण अथवा सूचीकरण से संबंधित ऐसी विधि है जिसे विषय अनुक्रमणिका प्रविष्टि के निर्माण अथवा विषय शीर्षको के निर्माण में प्रयोग किया जाता है यह विधि अन्य कार्यों के लिए भी उपयोगी हो सकती है यह अनुक्रमणीकरण पद्धति सूचना पुनर्प्राप्ति में विशेष सहायक है पॉप्सी का विकास प्रत्यक्ष रूप से मुख आश्रित वर्गीकरण तथा संबंधनात्मक विश्लेषण की कुछ तकनीकों की सहायता से डॉक्टर रंगनाथन द्वारा किया गया इसके शुरू के संस्करण रंगनाथन के मूलभूत श्रेणियों तथा आधार वर्गों पर आधारित थे किसी प्रलेख के विषय को अभीधारण की विधि (मेथड ऑफ पाश्चुलेट )के आधार पर पक्षों में विशलेषित किया जाता है

Call number

पुस्तकालय में वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक पुस्तक को व्यक्तिगत संख्या प्रदान करना है अर्थात पुस्तकालय में पुस्तकों को एक निश्चित सहायक क्रम में व्यवस्थित किया जाता है इसके लिए पुस्तकों को कृत्रिम अंक प्रदान किए जाते हैं यह कृतिम अंक ही पुस्तकों को व्यक्तित्व प्रदान करते हैं इन अंको को ही क्रमांक संख्या या कॉल नंबर कहा जाता है

डॉक्टर रंगनाथन के अनुसार पुस्तकालय में एक प्रलेख की अन्य प्रलेख के मध्य तथा सूची में किसी प्रविष्टि की अन्य प्रविष्टि के मध्य सुनिश्चित सापेक्षिक स्थिति को दर्शाने वाली संख्या को क्रमांक संख्या कहते हैं

क्रमांक संख्या के 3 भाग होते हैं 1- क्लास नंबर २-बुक नंबर 3-कलेक्शन नंबर

Class number- वर्गीकरण पद्धति में किसी पुस्तक में वर्णित विशिष्ट विषय के लिए प्रत्येक सांकेतिक अंक क्लास नम्बर कहलाता है अर्थात क्लास नंबर क्रमांक संख्या का भाग है जो किसी प्रलेख के विशिष्ट विषय का प्रतिनिधित्व प्रदान करता है

डॉक्टर रंगनाथन के अनुसार किसी पुस्तक का क्लास नंबर उसके विशिष्ट विषय के नाम का क्रम दर्शक अंक की कृतिम भाषा में अनुवाद है इस प्रकार क्लास नंबर द्वारा किसी प्रलेख का विशिष्ट विषय रूपांतरित किया जाता है अथवा प्रलेख को क्लास नम्बर प्रदान करने के लिए प्रलेख में वर्णित विषय का क्रमिक संख्या की भाषा में अनुवाद किया जाता है इस भाषा को वर्गीकरण सांकेतिक भाषा द्वारा निर्मित वर्ग संख्या के संकेत चिन्हों का अर्थ लगाने से विशिष्ट वर्गीकृत विषय का ज्ञान हो जाता है

वर्गीकरण पद्धति (Classification scheme)

पुस्तकालय में पाठ्य सामग्री का संग्रह किया जाता है एवं इसके उपयोग की व्यवस्था की जाती है इस व्यवस्था की पद्धति को वर्गीकरण पद्धति कहते हैं वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्य पाठ्य सामग्री को इस प्रकार व्यवस्थित करना है जिससे इसका उपयोग सुविधा पूर्वक हो सके इसके लिए आवश्यक है कि एक वैज्ञानिक वर्गीकरण पद्धति हो

वर्गीकरण पद्धति के प्रकार- पुस्तकालय वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्य विषय के अनुसार पुस्तकों का वर्गीकरण करना है डॉक्टर रंगनाथन ने विषयों के वर्गीकरण के लिए मुख्य रूप से निम्न पद्धतियां दी हैं

1- परिगनात्मक पद्धति ( enumerative scheme)

2- लगभग परिगनात्मक पद्धति ( almost enumerative scheme)

3- लगभग पक्षात्मक पद्धति ( almost faceted scheme)

4- अपरिवर्तनीय पक्षात्मक पद्धति ( Rigidly Faceted scheme)

5- मुक्त पक्षात्मक पद्धति (Freely Faceted scheme)

प्रमुख वर्गीकरण पद्धतियां

Dewey decimal classification -melvil Dewey 1876

Expensive classification – charls cutter 1891

Library of Congress classification- Library of Congress 1904

Universel decimal classification- institute international D. Bibliography 1905

Subject classification – James Duff Brown 1906

Colon classification – S. R. Ranganathan 1933

Bibliographic classifications – H.E. bliss 1935

Notation अंकन

अंकन की परिभाषा

एच ई ब्लिस के अनुसार — अंकन किसी क्रम व्यवस्था में चिन्हों अथवा प्रतीकों की एक विधि है जिससे पदों अथवा किसी माला के प्रतिनिधियों अथवा वस्तुओं के व्यवस्था क्रम को निर्दिष्ट किया जाता है

डॉ रंगनाथन के अनुसार — किसी वर्गीकरण पद्धति में वर्गों को प्रस्तुत करने के लिए प्रयुक्त क्रमिक अंको की विधि को अंकन (notation) कहते है।

अंकन के प्रकार

अंकन दो प्रकार के होते हैं

1- शुद्व अंकन (pure notation ) // 2. मिश्रित अंकन ( Mixed Notation)

1. Pure notation — शुद्ध अंकन वह है जिसका निर्माण केवल एक ही प्रकार के प्रतीकों अथवा चिन्हों से होता है उदाहरणार्थ- 1 – 9 or A to Z .

शुद्ध अंकन का सर्वोत्तम उदाहरण मेलविल dewey की DDC (दशमलव वर्गीकरण पद्धति) है इसमें शुद्ध अंकन का उपयोग सर्वप्रथम किया गया था इस प्रणाली में मात्र अरेबिक अंकों का ही उपयोग किया गया है C.A. Cutter का एक्सपेंसिव क्लासिफिकेशन भी एक दृष्टि से शुद्ध अंकन का माना जाता है

2. Mixed Notation – मिश्रित अंकन शेर तात्पर्य उस अंकन से है जिसका निर्माण दो या दो से अधिक प्रतीकों अथवा चिन्हों से होता है उदाहरणार्थ — (0,1,2,3 ……. 7,8,9) or ( A to Z ) or ( a to z) or (∆ ,; : . () )

मिश्रित अंकन का उपयोग सर्वप्रथम रिचर्ड्सन महोदय ने अपने प्रणाली प्रेस्टन स्कीम में किया और इसकी उपयोगिता को बढ़ाया जिसके अंतर्गत संख्याओं और अक्षर दोनों का उपयोग है

लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस , सब्जेक्ट क्लासिफिकेशन , कोलन क्लासिफिकेशन , बिबलियोग्राफिक क्लासिफिकेशन मिश्रित अंकन के उदाहरण है।

COPYRIGHT LAW IN INDIA

भारत में कॉपीराइट अधिनियम एक्ट 1957 21 जनवरी 1958 को लागू हुआ था यह पहले प्रकाशित तस्वीरों के लिए 50 वर्ष था इसमें 6 बार संशोधन हो चुका है कॉपीराइट एक कानूनी शब्द है जिसका प्रयोग रचनाकारों के साहित्यिक और कलात्मक कार्यों के अधिकारों के वर्णन के लिए किया जाता है जिसमें पुस्तकें ,संगीत ,पेंटिंग ,मूर्तिकला ,फिल्म ,कंप्यूटर प्रोग्राम ,डेटाबेस ,विज्ञापन, मानचित्र और तकनीकी चित्र आदि शामिल है प्रतिलिपि अधिकार बौद्धिक संपदा का ही भाग है भारत में प्रतिलिपि अधिकार लेखक की मृत्यु के बाद 60 वर्षों तक रहता है

ISBN

ISBN(international standard book number) प्रत्येक पुस्तक को प्रदान किए जाने वाला एक विशिष्ट पहचान संख्या है ब्रिटेन के David Whitaker को ISBN के पिता की संज्ञा दी जाती हैं।1971 में (ISO) international organization for standardization द्वारा 10 अंकों का ISBN विकसित किया जो ISO2108 के तहत प्रकाशित किया गया। जनवरी 2007 से ISBN 13 अंको का और पाँच भागो में विभक्त हो गया पहला भाग ean(european article number ) होता है ,दूसरा भाग भाषा आदि ,तीसरा भाग प्रकाशक, चौथा भाग टाइटल और पांचवा भाग चेक डिजिट होता है।

reference service

एस.आर.  रंगनाथन के अनुसार "संदर्भ सेवा व्यक्तिगत रूप से एक पाठक और उसके दस्तावेजों के बीच संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया है।"  A...